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  हमने प्रथम पोस्ट  में  कपड़े के प्रकार का वर्णन किया अब हम आपको उसमें से वूल फेब्रिक के बारे में बताएंगे   वूल फेब्रिक (WOOL FABRIC) भारत दुनिया में ऊन का नौवां सबसे बड़ा उत्पादक है , जिसमें वैश्विक उत्पादन हिस्सेदारी लगभग 2% है । 2019-20 तक भारत की ऊन की खपत 260 मिलियन किलोग्राम तक पहुंचने की उम्मीद है। ऊन उद्योग पंजाब , हरियाणा , राजस्थान , उत्तर प्रदेश , महाराष्ट्र और गुजरात में केंद्रित है। पंजाब में भारत में ऊन उत्पादन इकाइयों का लगभग 35% हिस्सा है , इसके बाद महाराष्ट्र और राजस्थान हैं वार्षिक ऊन उत्पादन 43-46 मिलियन किलोग्राम की सीमा में है। भारत में ऊन वस्त्र उद्योग एक स्वस्थ दर से बढ़ने की ओर अग्रसर है। इस उद्योग में प्रौद्योगिकी की उच्च दर , सरकारी प्रोत्साहनों और अन्य क्षमता निर्माण पहलों के साथ-साथ घरेलू खपत को प्रोत्साहित करने के अलावा निर्यात में वृद्धि हुई है । सितंबर , 2020 वस्त्र और परिधान उद्योग को मोटे तौर पर दो खंडों में विभाजित किया जा सकता है - यार्न और फाइबर और प्रसंस्कृत कपड़े और परिधान। वित्त वर्ष 2019 में घरेलू कपड़ा और अपैरल ...
 आज हम आपको  इस् पोस्ट के जरिये कपडे के बारे मै बताने जा रहे है। कपड़े विभिन्न प्राकृतिक या कृत्रिम या मिश्रित कच्चे माल से बने होते हैं। कपड़े को फाइबर या कच्चे माल की उत्पत्ति और इसकी प्रक्रियाओं के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। विश्व में तीन प्रकार के कपड़े उपलब्ध हैं।    1. Natural Fabrics( प्राकृतिक कपड़े ) सूती कपड़े    ( Cotton Fabric) रेशमी कपड़ा ( Silk Fabric) लिनन कपड़े  ( Linen Fabric) ऊन का कपड़ा ( Wool Fabric) चमड़े का कपड़ा ( Leather Fabric) रामी कपड़ा ( Ramie Fabric) गांजा कपड़ा ( Hemp Fabric) जूट का कपड़ा ( Jute Fabric)                                                                                                                       2.सिं...